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Showing posts from November, 2022

मजेदार कहानी - पनौती और टेम्पो वाला

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  एक बार एक गांव में एक काका बहुत बीमार हो गए और उन्हें पास के ही एक शहर के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा । कुछ दिन बीत जाने के बाद गांव के लोगों ने आपस में ये तय किया कि सब मिलकर शहर चलते हैं औऱ काका का हाल चाल लेते हैं। फ़िर सबके सामने समस्या ये उठ खड़ी हुई कि आखिर शहर चला कैसे जाए ??? बाद में सामुहिक रूप से ये तय किया गया कि सब मिलकर एक बड़ा टेम्पू भाड़े पर लेते हैं और उसका किराया आपस में बांट लेंगें । भाड़े पर एक टेम्पू लिया गया जिसमें सिर्फ़ पंद्रह लोगों के बैठने भर की जगह थी । साथ ही उसका किराया एक सौ रुपए प्रति व्यक्ति तय हुआ लेकिन अंत में कुल मिलाकर चौदह लोग ही शहर जाने के लिए तैयार हुए। टेंपू चालक ने सब लोगों से बहुत ज़ोर से आग्रह किया औऱ कहा कि टेंपू में कुल पंद्रह सीट है , एक और व्यक्ति को जोड़ लो ताकि मेरी एक सीट खाली न हो , पर लाख प्रयास के बावजूद एक औऱ आदमी का इंतज़ाम न हो सका। अब चौदह लोगों के साथ गाड़ी चलने ही वाली थी कि गली के आखिरी कोने पर गुड्डू दौड़ता और आवाज़ देता देखा गया। गाड़ी के चौदह यात्री चीख़ पड़े....अबे गाड़ी जल्दी चलाओ , इसे हरगिज़ साथ मत ले जान...

ज्ञानवर्धक कहानी - राजा और उसकी मूर्ख प्रजा

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एक बार किसी प्रदेश के एक न्यायप्रिय राजा को ये जानने की तीव्र इच्छा हुई कि उसकी प्रजा कितनी जागरूक औऱ संवेदनशील है...। राजा ने इसके लिए तुरंत अपनी मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई औऱ सभी वरिष्ठ मंत्रियों से उनके सुझाव मांगें । सभी ने अपने अपने तरह से सुझाव दिए , उनमें एक सुझाव राजा को ठीक लगा। सुझाव के मुताबिक राजा ने अपने प्रदेश में ऐसी जगह एक पुल का निर्माण करा डाला , जहाँ लोगों को उसकी कोई जरुरत ही नहीं थी। राजा ने ये सोचकर पुल के एक तरफ एक पेटी भी रखवा दी ताकि लोग अपने विचार या विरोध लिखकर इसमें डाल सकें...। उद्घाटन के बाद लोगों ने पुल के ऊपर से आना जाना शुरू कर दिया...। कुछ दिनों के बाद राजा ने कौतूहलवश लोगों के विचार जानने के लिए पेटी खोली लेकिन वो हैरान था , उसमें एक भी मत पर्ची नहीं थी....। उसके बाद राजा ने फ़िर कुछ सोचकर पुल पार करने वालों के ऊपर टैक्स लगा दिया । उसे उम्मीद थी कि आर्थिक बोझ के बाद अब जरूर उसकी प्रजा इसका विरोध करेगी । राजा एक बार फिर चकित रह गया , क्योंकि इस बार भी मत पेटी में किसी भी व्यक्ति का कोई मत नहीं था....। राजा अपनी प्रजा की इस उदासीनता औऱ संवेदनही...

कहानी - मेनेजर और चार चोर

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  शहर के बाहरी हिस्से में मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करने वाले एक सेल्स मैनेजर अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। वह रोज सुबह काम पर निकल जाते और देर शाम को घर लौटते। एक बार कुछ चोरों ने मैनेजर के घर में चोरी करने का मन बनाया। चोरी करने के दो-चार दिन पहले से ही वे उनके घर के आस-पास चक्कर लगाने लगे और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने लगे। एक दिन चोरों ने एक अजीब सी चीज देखी। मैनेजर साहब जब शाम को लौटे तो वह घर में घुसने से पहले बागीचे में लगे आम के पेड़ के पास जाकर खड़े हो गए। उसके बाद उन्होंने अपने बैग में से एक-एक करके कुछ निकाला और पेड़ में कहीं डाल दिया। चूँकि उनकी पीठ चोरों की तरफ थी इसलिए वे ठीक से देख नहीं पाए कि आखिर मैनेजर ने क्या निकाला और कहाँ डाला। खैर! इतना देख लेना ही चोरों के लिए काफी था। उनकी आँखें चमक गयीं ; उन्होंने सोचा कि ज़रूर मैनेजर ने वहां कोई कीमती चीज या पैसे छुपाये होंगे। मैनेजर के अन्दर जाते ही चोर थोड़ा और अँधेरा होने का इंतज़ार करने लगे और जब उन्हें तसल्ली हो गयी कि मैनेजर साहब खा-पीकर सो गए हैं तो वे धीरे से बाउंड्री कूद कर उनके घर में दाखिल हुए। ...