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ज्ञानवर्धक कहानी - राजा और उसकी मूर्ख प्रजा

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एक बार किसी प्रदेश के एक न्यायप्रिय राजा को ये जानने की तीव्र इच्छा हुई कि उसकी प्रजा कितनी जागरूक औऱ संवेदनशील है...। राजा ने इसके लिए तुरंत अपनी मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई औऱ सभी वरिष्ठ मंत्रियों से उनके सुझाव मांगें । सभी ने अपने अपने तरह से सुझाव दिए , उनमें एक सुझाव राजा को ठीक लगा। सुझाव के मुताबिक राजा ने अपने प्रदेश में ऐसी जगह एक पुल का निर्माण करा डाला , जहाँ लोगों को उसकी कोई जरुरत ही नहीं थी। राजा ने ये सोचकर पुल के एक तरफ एक पेटी भी रखवा दी ताकि लोग अपने विचार या विरोध लिखकर इसमें डाल सकें...। उद्घाटन के बाद लोगों ने पुल के ऊपर से आना जाना शुरू कर दिया...। कुछ दिनों के बाद राजा ने कौतूहलवश लोगों के विचार जानने के लिए पेटी खोली लेकिन वो हैरान था , उसमें एक भी मत पर्ची नहीं थी....। उसके बाद राजा ने फ़िर कुछ सोचकर पुल पार करने वालों के ऊपर टैक्स लगा दिया । उसे उम्मीद थी कि आर्थिक बोझ के बाद अब जरूर उसकी प्रजा इसका विरोध करेगी । राजा एक बार फिर चकित रह गया , क्योंकि इस बार भी मत पेटी में किसी भी व्यक्ति का कोई मत नहीं था....। राजा अपनी प्रजा की इस उदासीनता औऱ संवेदनही...

कहानी - मेनेजर और चार चोर

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  शहर के बाहरी हिस्से में मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करने वाले एक सेल्स मैनेजर अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। वह रोज सुबह काम पर निकल जाते और देर शाम को घर लौटते। एक बार कुछ चोरों ने मैनेजर के घर में चोरी करने का मन बनाया। चोरी करने के दो-चार दिन पहले से ही वे उनके घर के आस-पास चक्कर लगाने लगे और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने लगे। एक दिन चोरों ने एक अजीब सी चीज देखी। मैनेजर साहब जब शाम को लौटे तो वह घर में घुसने से पहले बागीचे में लगे आम के पेड़ के पास जाकर खड़े हो गए। उसके बाद उन्होंने अपने बैग में से एक-एक करके कुछ निकाला और पेड़ में कहीं डाल दिया। चूँकि उनकी पीठ चोरों की तरफ थी इसलिए वे ठीक से देख नहीं पाए कि आखिर मैनेजर ने क्या निकाला और कहाँ डाला। खैर! इतना देख लेना ही चोरों के लिए काफी था। उनकी आँखें चमक गयीं ; उन्होंने सोचा कि ज़रूर मैनेजर ने वहां कोई कीमती चीज या पैसे छुपाये होंगे। मैनेजर के अन्दर जाते ही चोर थोड़ा और अँधेरा होने का इंतज़ार करने लगे और जब उन्हें तसल्ली हो गयी कि मैनेजर साहब खा-पीकर सो गए हैं तो वे धीरे से बाउंड्री कूद कर उनके घर में दाखिल हुए। ...

ज्ञानवर्धक कहानी - हिरण और विपदाओ का आना

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जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी , कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये। वहां पहुँचते ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी। उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी। उसने दाये देखा , तो एक शिकारी तीर का निशाना , उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी , तो वहां एक भूखा शेर , झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी , तो नदी में जल बहुत था। मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ? क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ? क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ? वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ? हिरनी अपने आप को शून्य में छोड , अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए , शिकारी की आँखे चौंधिया गयी।...