भूत की कहानी - मौसी का घर
वो 11 वीं की गर्मी की छुट्टियां थी जब हम हर बार की तरह इस बार भी नानी के घर गए। मेरी एक मासी की शादी ननिहाल के बहुत पास हुई है तो हम कुछ दिन मौसी के घर भी जरूर जाते थे किसी भी दिन मौसा जी या भईया लोग जीप लेकर आते और हमें लेकर जाते । मौसी के घर का हमें दो बड़ा आकर्षण था पहला कि वह घर बेहद सुंदर सुव्यवस्थित ढंग से बना था। उसके वर्णन में जवाब बहुत ज्यादा लंबा हो जाएगा तो दूसरे आकर्षण की बात करूं तो वो _ मौसी की लाइब्रेरी ! एक कमरा और कमरे में हर तरह , हर भाषा की हिंदी में अनूदित कहानी , उपन्यास , पत्रिकाओं से भरी _ बड़ी बड़ी अलमारियां ! इन किताबों का हमें प्रबल आकर्षण था सुबह शाम नाश्ता खाना को छोड़ कर हम दिन भर इन किताबों में डूबे रहते _ सुध बुध बिसरा के ! तो उस भव्य सुंदर लायब्रेरी वाले घर में एक बड़ा आंगन भी था।( वह अक्सर पुराने घरों में होना जरूरी होता था/ है।) जिसके चारों ओर बरामदा और पंक्ति से कमरे , सीढ़ियां , वॉशरूम , स्टोर वगैरह था। लाइब्रेरी वाले रूम के अगल-बगल एक सीध में चार कमरे थे। लाइब्रेरी में चौकी( तखत। चार पायो वाला लकड़ी का पलंग )लगाकर भईया सोता थ...