बड़े उदद्योगपति और ईमानदार नेता जी
एक नामी उद्योगपति अपने किसी निज़ी काम के सिलसिले में एक बड़े नेताजी के यहाँ पहुंचा । बेचारे नेताजी ऐसे व्यक्ति थे कि उनकी ईमानदारी की चर्चा पूरे इलाक़े भर में थी ।
उद्योगपति महोदय ने हाथ जोड़कर विनम्रता के साथ नेताजी से कहा....सर,एक बड़ा रेलवे का काम आपके इलाक़े में हो रहा है, उसके ठेके को लेने के लिए आपकी मदद चाहिए ,बदले में आपका जो आदेश होगा उसके लिए मै तैयार हूं ।
नेताजी ने गंभीर स्वर में कहा... श्रीमान, काम तो मैं आपका करा दूँगा , लेकिन मैं किसी से कुछ लेता नहीं हूँ ।
कुछ दिनों बाद जब नेताजी ने उद्योगपति महोदय का काम करा दिया तो खुश होकर वे एक नई चमचमाती मर्सिडीज कार लेकर नेताजी के घर हाज़िर हो गए औऱ उसे नेताजी को देने की पेशकश की ।
नेताजी : नहीं, नहीं, नहीं....मैं इसे मुफ्त में नहीं ले सकता , लेकिन अगर आप ज़िद कर रहे हैं तो आपकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मैं इस कार को रख लूंगा , फ़िर भी इसके लिए मैं आपको कुछ पैसे देना चाहता हूं .....।
नेताजी के बहुत समझाने के बाद उद्योगपति मान गया और बोला... ठीक है सर...आप कार के बदले सिर्फ़ मुझें पांच रुपया दें।
नेताजी ने झट से दस का एक नोट निकाल कर उद्योगपति महोदय को पकड़ा दिया ।
उद्योगपति महोदय ने बेहद मजाकिया लहजे में कहा...माफ़ कीजियेगा सर , मेरे पास वापस करने के लिए पांच रुपये खुदरा नहीं है....
नेताजी : कोई बात नहीं...आप बिलकुल चिंता मत कीजिए ।आप बस उस पांच रुपए के बदले मेरी पत्नी के लिए ऐसी ही एक और कार दे दीजिएगा....!!
नेताजी की बात सुनकर उद्योगपति महोदय भावुक हो गए औऱ उनसे इतना ही कहा...कसम से सर, ईमानदारी अभी भी जिन्दा है.........!!
मन मसोसकर उद्योगपति महोदय वहाँ से सरपट निकले औऱ मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा किया कि .........."..ये तो राहत की बात है कि नेताजी ने बीस रुपए का नोट नहीं पकड़ाया , वरना इतना खुदरा लौटने में तो मैं ख़ुद ही बिक जाता ......" !!

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