अंकल और दरवाजे मे खड़ा छोटा सा लड़का
एक आदमी सुबह सुबह अपने दोस्त के घर गया।वहाँ पहुंच कर उसने बेल बजाई…....उस समय उसका दोस्त घर पर नहीं था.....दरवाजा एक 4 साल के बच्चे ने खोला.....
माँ ने किचन से अपना काम करते हुए ही बच्चे से पूछा – कौन है बेटा ?
बेटा – अंकल आये है....मम्मी…
मम्मी – कौन अंकल ?
वो आदमी भी जरा उत्सुक हुआ कि देखते हैं बच्चा उनके बारे में अपनी मां को कैसे बताता है.......
बेटे ने कहा – मम्मी वही अंकल आये है जिनके जाने के बाद आप हमेशा पापा को डांटती हैं कि तुम्हारा ये भिखारी दोस्त हमेशा खाने के टाईम पर ही आ धमकता है...... भुक्कड़ कही का…...मना भी करता जाता है और ठूँसते भी जाता है और खाते समय कुकुर जैसी चप-चप की तेज़ आवाज भी निकालता है औऱ तो औऱ बक बक करके पूरा माथा ख़राब कर देता है...गधा कहीं का...
ये सुनकर वह आदमी वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा…........
नैतिक शिक्षा.......बच्चों को क़भी क़भी परिस्थिति के अनुसार झूठ बोलना भी सिखायें...नहीं तो क़भी भी आपका कबाड़ा हो सकता है...........

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