एक ट्रेन की यात्रा और छोटा शरारती बच्चा
यात्रा के दौरान एक प्राइवेट ट्रेन में एक बार एक पांच साल के बच्चे को टायलेट जाना था तो वह अपनी मम्मी को साथ लेकर गया....उसकी मम्मी ने उसे टायलेट में बैठाकर कुछ देर के बाद दरवाजे के बाहर से पूछा... बेटा कितनी देर लगेगी..?
लड़का बोला.... बस पांच मिनट मम्मी..
उसकी मम्मी ने कहा... ठीक है बेटा, आराम से कर ले, मैं आती हूं पांच मिनट में.......
लेकिन वह बच्चा दो मिनट में ही निवृत हो गया और खुद साफ सफाई करके,पैन्ट पहन कर बाहर निकल कर पास में पेंट्री की तरफ जाकर ट्रेन की होस्टेस के साथ खेलने लगा......
अब ऐसा संयोग था कि इसी ट्रेन में गुप्ता जी भी पहली बार सफर कर रहे थे और उनको भी जोर की टायलेट लगी .. और वो भी इत्तेफ़ाक़न उसी टायलेट में चले गये जिसमें पहले बच्चा गया था......
गुप्ता जी आराम से हल्के हो रहे थे कि उस बच्चे की मम्मी ने बाहर से दरवाज़ा खड़खड़ा कर पूंछा...अरे हो गई हो तो धुलवा कर पैंट पहना दूं या अभी औऱ समय लगेगा......
यह सुनते ही गुप्ता जी तो गदगद हो गये ,उनकी आखें खुशी से नम हो गयी और वे अपने मन ही मन बुदबुदाने लगे....." इसे कहते है "सर्विस"

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