एक शिक्षक और चोर की मजेदार कहानी


गुप्ता जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे । सेवानिवृत्ति के पश्चात वे अपनी पत्नी के साथ गुड़गांव के एक छोटे से फ्लैट में रहते थे ।

एक बार गर्मियों में उन्होंने पत्नी के साथ कश्मीर घूमने की योजना बनाई। लेकिन उनके इलाके में प्रायः प्रतिदिन चोरी की घटनाएं होती रहती थी जिसके कारण वे अपने घर की सुरक्षा को लेकर बड़े चिंतित थे ।

कश्मीर जाने से पहले गुप्ता जी ने सोचा कि अगर उनकी गैरमौजूदगी में कोई चोर उचक्का घुस गया तो वो घर की सारी अलमारी और बक्से तोड़कर क्षतिग्रस्त कर देगा क्योंकि उसे कोई नकद तो मिलेगा नहीं ।

इसलिए बहुत सोच विचार के बाद उन्होने अपने घर को तहस नहस होने से बचाने के लिए दो हजार का एक नोट चोर के लिए टेबल पर रख दिए।

इसके साथ ही उन्होंने चोर के नाम एक भावनात्मक पत्र को भी वहाँ छोड़ दिया जिसमें लिखा था....." हे परम आदरणीय अनचाहे अथिति जी.... मेरे घर में प्रवेश करने के लिए आपने कड़ी मेहनत की , इसके लिए आपको हार्दिक

बधाई

, लेकिन बहुत गहरे अफसोस के साथ मुझें ये कहना पड़ रहा है कि हम शुरू से ही एक बेहद साधारण निम्न मध्यम वर्गीय परिवार हैं और हमारा पूरा परिवार पेंशन के थोड़े से पैसे से चलता है। इसलिए हमारे पास कोई अतिरिक्त नकदी नहीं है। मुझे सच में बहुत शर्म आ रही है कि यहाँ आपकी मेहनत और आपका कीमती समय बर्बाद हो रहा है। इसलिए मैंने आपकी पैरों की धूल के सम्मान में अपनी हैसियत के मुताबिक़ थोड़े से पैसे टेबल पर छोड़ दिए हैं। कृपया इसे श्रद्धा के साथ स्वीकार करें । इसके साथ ही मैं आपको आपके जोख़िम भरे व्यवसाय में वृद्धि के लिए कुछ बेहतरीन तरीके बता रहा हूं। आप कोशिश कर सकते हैं। सफलता आपके कदमों को चूमेगी । मेरे फ्लैट के ठीक सामने सातवीं मंजिल पर एक बहुत प्रभावशाली मंत्री जी रहते हैं । नामी प्रॉपर्टी डीलर आठवें माले में रहता है। सहकारी बैंक के अध्यक्ष छठे तल पर रहते हैं। पांचवी मंजिल पर प्रमुख उद्योगपति। चौथी मंजिल पर नामी ठीकेदार हैं व तीसरी मंजिल पर एक भ्रष्ट इंजीनियर है। इन सबका घर गहनों और नकदी से लबालब भरा हुआ है। मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि आपकी व्यावसायिक सफलता इनमें से किसी को भी तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचाएगी और उनमें से कोई भी संभवतः पुलिस को भी रिपोर्ट नहीं करेगा "......शुभकामनाओं के साथ आपका एक शुभचिंतक "

कश्मीर घूमने के बाद जब गुप्ता जी और उनकी पत्नी वापस लौटे तो उन्हें अपने घर के अंदर टेबल पर एक बैग रखा मिला।

बैग में पाँच लाख रुपए नकद और एक पत्र रखा देखकर वे दोनों बेहद हैरान रह गये।

उस पत्र में लिखा था......" आपके बेहतरीन दिशानिर्देश और मार्गदर्शन के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद गुरुदेव , मुझे इस बात का बेहद अफ़सोस है कि मैं पहले आपके करीब क्यों नहीं आ पाया। आपके निर्देशानुसार मैंने अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। आपकी इस बहमूल्य सहायता के बदले मैं गुरुदक्षिणा के तौर पर एक छोटी सी राशि आपके लिए छोड़े जा रहा हूँ । भविष्य में भी मैं इसी तरह आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन की कामना करता हूँ ".........आपका परम आज्ञाकारी चोर ।

 

 

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