किसान की मेहनत और राजा की परीक्षा
“बहुत समय पहले मध्य प्रदेश के रीवा राज्य के एक प्रतापी राजा ने अपने कुछ सैनिको की मदद से नगर के मुख्य सड़क पर एक बहुत बड़ा पत्थर रखवा दिया। और सड़क के किनारे एक सराय मे रूप बादल कर वहाँ रहने लगा। और बालकनी से बैठकर उसी पत्थर की तरफ ताकता रहता। यह जानने के लिए की नगर मे ऐसा कौन है इस रास्ते मे पड़े पत्थर को हटाएगा। लेकिन, राजा के बड़े बड़े व्यापारी, मंत्री और सेना नायक कई बार उस रास्ते से निकलते थे, लेकिन किसी ने भी उस पत्थर को हटाना जरूरी नहीं समझा। आम लोग जब उस रास्ते से निकलते थे, तो वो राजा को दोष देते की राजा कुछ करता क्यो नहीं हैं।
क्या सिर्फ राजा कर लेने के लिए और लड़ाइयाँ लड़ने के लिए हैं? ऐसे प्रश्न राजा पर उठाने लगते। आसपास के लोगो को जमा करके राजा के खिलाफ मौहोल बनाते। लेकिन उनसे वो रास्ते मे पड़ा पत्थर न हटाया जाता।
एक दिन एक किसान उसी रास्ते से निकाल रहा था, उसने अपने सर पर सब्जियों से बारी टोकरी राखी हुई थी। वह नगर की तरफ अपनी खेत से ताजी टोडी हुई सब्जियाँ बेचने जा रहा था, वह हफ्ते मे एक बार ही नगर की ओर आया करता था। उसने सड़क मे जब विशाल पत्थर को देखा, जो वहाँ के आने-जाने वाले लोगो के रास्ते को बाधित कर रहा था। उसने अपनी टोकरी को सर से हटाया और सड़क के किनारे रख कर, सड़क के बेच मे पड़े उस विशाल पत्थर को हटाने लगा। राजा भी बगल के सराय के बालकनी से यह सब देख रहा था। बहुत प्रयास और मेहनत के बाद आखिर कार उस किसान ने उस पत्थर को हटा दिया। जब वह अपनी टोकनी लेने के लिए जा रहा था, तभी उसने देखा की जिस पत्थर को उसने हटाया हैं, उस पत्थर के नीचे एक थैला पड़ा हुआ था। उसने उस थैले को उठाया तो उसमे ढेर सारे सोने के सिक्के थे और राजा का पत्र था, जिसमे लिखा था, की यह उस व्यक्ति का इनाम हैं। जिसने रास्ते के बीच मे पड़े उस पत्थर को हटाया हैं।
इस लिए किसान ने उस पैसे को रख लिया। अगले दिन राजा ने किसान को दरबार मे बुला कर रीवा राज्य का श्रम मंत्री बना दिया। जब नगरवासियों को राजा के द्वारा लिए इस परीक्षा के बारे मे पता चला तो उन सब को अपने आलस मे बहुत ही सर्मिंदगी महसूस हुई।
शिक्षा - आलस की वजह से हमे मिलने वाला इनाम, किसी और को मिल जाता हैं।

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